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March 05, 2017

संसार को सही दृष्टि से देखना चाहिए।




 
                 कुछ व्यक्तियोँ को अपने अतिरिक्त अन्य सभी से कुछ न कुछ शिकायत रहा करती है, उन्हेँ इस दुनियाँ मेँ ढंग का कोई आदमी ही नजर नहीँ आता, मुश्किल से उंगलियोँ पर गिने जा सकने जितने व्यक्तियोँ से उन्हेँ कोई शिकायत नहीँ होती, वे ही उन्हेँ पसंद आते हैँ और अच्छे लगते हैँ। उनकी नजर मेँ कोई मूर्ख, कोई पागल, कोई फूहड़, कोई अनैतिक और मक्कार तो कोई और कुछ होता है, पर भला नहीँ। ऐसे व्यक्तियोँ के लिए यह संसार एक प्रकार से जेलखाना और अपना जीवन एक बंदी का सा होता है। हर व्यक्ति को अपनी ही मान्यताओँ अपने ही आदर्शोँ, अपने ही विचारोँ और अपनी ही व्यक्तिगत पसंदगी से नापना कोई बुद्धिमत्तापूर्ण कार्य नहीँ हो सकता



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13 comments:

Shanti Garg said...

लम्बे समय बाद सभी पाठको का जीवनविचार पर स्वागत है ।
धन्यवाद।

JEEWANTIPS said...

Sahi kaha....
Thanks to you.

kuldeep thakur said...

दिनांक 07/03/2017 को...
आप की रचना का लिंक होगा...
पांच लिंकों का आनंदhttps://www.halchalwith5links.blogspot.com पर...
आप भी इस चर्चा में सादर आमंत्रित हैं...
आप की प्रतीक्षा रहेगी...

Shanti Garg said...

Kuldeep ji,
Thanks

Pammi said...

जी,बहुत बढियाँ...
सत्य जीवन विचार।

sarvesh bagoria said...

Bhut acche vichar h aap ke keep posting and keep visitng on https://kahanikikitab.blogspot.in

Kailash Sharma said...

बिलकुल सही कहा है...बहुत सुन्दर और सार्थक चिंतन...

savan kumar said...

सत्य बचन
होली की शुभकामनाएं
http://savanxxx.blogspot.in

Onkar said...

सही कहा आपने

Sanju said...

Sahi kaha....
Shubhkamnaye

Sanju said...

साथॆक प्रस्तुतिकरण......
मेरे ब्लाॅग की नयी पोस्ट पर आपके विचारों की प्रतीक्षा....

Digamber Naswa said...

आपका कहना सही है ... पर ऐसा होता नहीं ... इंसान अपनी ही दृष्टि को सही मानता है ...

JEEWANTIPS said...

बहुत प्रभावपूर्ण रचना......
मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपके विचारों का इन्तज़ार.....